Sleep Divorce : भारत में आज तल कपल्स के बीच स्लीप डिवोर्स काफी बढ़ रहा है। इसका मतलब है कपल का अलग-अलग बेड या कमरे में सोने के लिए चले जाना। एक्सपर्ट्स का कहना है कि काम के तनाव, अलग लाइफस्टाइल, खर्राटे या नींद में होने वाली रुकावटें जैसी समस्याओं के कारण कई वर्किंग कपल्स इस ट्रेंड को अपना रहे हैं। इससे दोनों को अच्छी नींद मिलती है और अगला दिन एनर्जी से भरपूर रहता है।
एक्सपर्ट्स कि मानें, तो स्लीप डिवोर्स से रिलेशनशिप में झगड़े कम होते हैं और पर्सनल स्पेस भी बढ़ता है। हालांकि, इसके नुकसान भी काफी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर आप लंबे समय तक ऐसा करते हैं तो आप दोनों के बीच इमोशनल कनेक्शन कमजोर हो सकता है। जिसकी वजह से कपल्स में दूरी बढ़ सकती है। इसलिए, स्लीप डिवोर्स तभी फायदेमंद है जब दोनों पार्टनर इसके बारे में अच्छे से जानते और समझते हो।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्लीप डिवोर्स एक ऐसा ट्रेंड है। जिसमें कपल्स अपनी नींद और कंफर्ट को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कमरों में जाकर सोना पसंद करते हैं। आजकल की बिजी लाइफस्टाइल, वर्क प्रेशर और अलग-अलग शेड्यूल के कारण यह चलन बढ़ता जा रहा है। कई बार एक पार्टनर के खर्राटे, देर रात तक मोबाइल चलाना या नाइट शिफ्ट जैसी आदतें दूसरे की नींद में बाधा डालती हैं। जिससे कई बार झगड़े होते है। ऐसे में स्लीप डिवोर्स रिश्ते में तनाव कम करने और दोनों को बेहतर नींद देने का एक बढ़िया सोल्यूशन हो सकता है।
कहां से शुरू हुआ था कॉन्सेप्ट
बताया जाता है कि स्लीप डिवोर्स का कॉन्सेप्ट सबसे पहले अमेरिका जैसे देशों में शुरू किया गया था। लेकिन, अब इसे। भारत में भी तेजी से अपनाया जा रहा है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन की 2024 की रिपोर्ट की मानें, तो 29 फीसदी अमेरिकियों ने अपने पार्टनर से अलग कमरे में सोना पसंद किया। जबकि, 2023 में यह आंकड़ा सिर्फ 20 फीसदी था। इससे देखा जा सकता है कि इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।









