Haryana: हरियाणा के पलवल जिले से अच्छी खबर आ रही है। यहां बघौला गांव में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बनाया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, इस यूनिवर्सिटी के लिए हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ ने 12 एकड़ जमीन विश्वविद्यालय के लिए दान दी है। शिक्षाविदों की मानें तो इससे हरियाणा और आसपास के राज्यों के युवाओं में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ेगी। वे आचार्य आदि उपाधि लेकर अपना करियर बना सकेंगे। संस्कृत के क्षेत्र में शोध भी होगा।
दिल्ली-एनसीआर के छात्रों को मिल सकेगा फायदा
खबरों की मानें, तो संस्कृत विद्यापीठ के प्रधानाचार्य पशुपति नाथ मिश्र ने बताया कि यह देश का 14वां केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय होगा। इसके बनने से न केवल संस्कृत के क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खुलेंगे, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और भाषा के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे छात्रों को ऐसा मंच मिलेगा जहां वे संस्कृत के गहन अध्ययन के साथ-साथ नई खोजों और अनुसंधानों में भी भाग ले सकेंगे। इसके बनने से दिल्ली-एनसीआर के छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकेगा।
2008 से है विश्वविद्यालय बनाने का प्रयास
खबरों की मानें, तो विश्वविद्यालय के कुलसचिव गायत्री मुरारी कृष्ण ने बताया कि हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए वर्ष 2008 से प्रयास चल रहे थे। किन्हीं कारणों से अभी तक यह संभव नहीं हो पाया था। कुछ समय पहले गांव के सरपंच सहित कुछ मौजिज लोग विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी से मिले। उनके सामने विद्यापीठ को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव रखते हुए जमीन दान देने की बात कही।
कुलपति ने इसे स्वीकार कर लिया। अब जमीन दान की प्रक्रिया पूरी हो गई। कुलसचिव गायत्री मुरारी कृष्ण ने कहाकि जमीन मिलने के बाद अब विश्वविद्यालय बनाने की तैयारी शुरू हो जाएगी। सरकार से अनुमति के बाद डीपीआर तैयार कराकर भवन बनाने का काम शुरू किया जाएगा।
14वां विश्वविद्यालय बनेगा बघौला में
बता दें कि अभी देश में 13 केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय हैं। जबकि 14वां विश्वविद्यालय अब बघौला में बनेगा।









