8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। जैसे-जैसे 8वें वेतन आयोग ने अपना काम शुरू किया है, देशभर के ग्रामीण डाक सेवकों (के लिए उम्मीदें भी बढ़ने लगी हैं।
जानकारी के मुताबिक, सांसद अंबिका जी लक्ष्मीनारायण वाल्मीकि ने PM मोदी को पत्र लिखकर 2.75 लाख ग्रामीण डाक सेवकों को 8वें वेतन आयोग के दायरे में शामिल करने की मांग की है। 8th Pay Commission
लाभ का हक
मिली जानकारी के अनुसार, सांसद वाल्मीकि ने PM को भेजे अपने पत्र में कहा, ‘लगभग 2.75 लाख ग्रामीण डाक सेवक डाक विभाग में कार्यरत हैं और ग्रामीण इलाकों में आवश्यक डाक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जिनका महत्व शहरी क्षेत्रों में दी जाने वाली सेवाओं के समान है।
जानकारी के मुताबिक, ‘ उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक है कि ग्रामीण डाक सेवकों के वेतन ढांचे और सेवा शर्तों की समीक्षा के लिए बार-बार अलग-अलग विभागीय समितियां गठित की जाती हैं, जिनकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त नौकरशाह करते हैं। मिली जानकारी के अनुसार, इस कारण से ग्रामीण डाक सेवक उन मुख्य लाभों से वंचित रह जाते हैं, जो नियमित केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को वेतन आयोगों की अनुशंसाओं के तहत मिलते हैं। 8th Pay Commission
कर्मचारी नहीं माने जाते
मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में केवल केंद्रीय सरकारी कर्मचारी ही वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत मिलने वाले वेतन और भत्तों के पात्र हैं। लेकिन GDS को केंद्रीय सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं है, इसलिए उन्हें 7वें या 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ नहीं मिलता। 8th Pay Commission
जानकारी के मुताबिक, सांसद वाल्मीकि ने आग्रह किया कि ग्रामीण डाक सेवकों को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के दायरे में शामिल किया जाए, ताकि उन्हें अन्य डाक विभाग के कर्मचारियों के समान वेतन संशोधन और सेवा लाभ मिल सकें। मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने आगे लिखा, ‘ऐसा करने से न केवल इस बड़े समूह के मेहनती डाक कर्मियों को न्याय मिलेगा, बल्कि डाक विभाग के ग्रामीण नेटवर्क की कार्यक्षमता और मनोबल में भी वृद्धि होगी।’ 8th Pay Commission
सिफारिशें…
मिली जानकारी के अनुसार, 7वें वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि ग्रामीण डाक सेवक (GDS) को केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। इसलिए आयोग ने यह भी अनुशंसा की थी कि डाक विभाग को GDS के वेतन और भत्तों का बजट ‘सैलरी’ शीर्षक से अलग रखा जाए, क्योंकि ‘सैलरीज’ शीर्षक केवल नियमित केंद्रीय कर्मचारियों के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए। 8th Pay Commission
जानकारी के मुताबिक, 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि डाक विभाग के व्यय वर्गीकरण की जांच से पता चलता है कि नियमित केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और ग्रामीण डाक सेवकों दोनों का वेतन और भत्ता ‘सैलरीज’ शीर्षक के अंतर्गत शामिल है। मिली जानकारी के अनुसार, चूंकि ग्रामीण डाक सेवकों को केंद्रीय सरकारी कर्मचारी नहीं माना जाता, इसलिए उनके वेतन और भत्तों का लेखा अलग शीर्षक के अंतर्गत होना चाहिए। 8th Pay Commission
शामिल किया जाएगा?
मिली जानकारी के अनुसार, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग के दायरे में GDS को शामिल करती है या नहीं। जानकारी के मुताबिक, सांसद की यह मांग डाक विभाग के लाखों ग्रामीण कर्मचारियों की पुरानी अपेक्षा को दोहराती है कि उन्हें भी नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान सुविधाएं, वेतन संशोधन और सेवा लाभ प्राप्त हों।












